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'दुनिया संसाधनों की नहीं, भरोसे की कमी से जूझ रही है', G7 में PM मोदी ने साझेदारी का नया मंत्र दिया

 Published : Jun 16, 2026 10:44 pm IST,  Updated : Jun 16, 2026 10:44 pm IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G7 शिखर सम्मेलन में कहा कि दुनिया संसाधनों की नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है। उन्होंने समानता, सम्मान और विश्वास आधारित वैश्विक साझेदारियों पर जोर दिया तथा ग्लोबल साउथ, अफ्रीका और क्षमता निर्माण को भारत की विकास नीति का केंद्र बताया।

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G7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सेशन में अपने विचार रखते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। Image Source : X.COM/NARENDRAMODI

एवियन (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सेशन में वैश्विक साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आज की दुनिया में सबसे बड़ी कमी संसाधनों की नहीं, बल्कि भरोसे की है। उन्होंने कहा कि भविष्य की वैश्विक साझेदारियों की सफलता इसी बात पर निर्भर करेगी कि देश आपसी विश्वास को कितना मजबूत बना पाते हैं। PM मोदी ने G7 शिखर सम्मेलन के दौरान 'नई साझेदारियों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण' विषय पर आयोजित आउटरीच सेशन में ये बयान दिया।

'भारत के लिए पूरी दुनिया एक परिवार है'

पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया पहले से कहीं ज्यादा जुड़ी हुई और एक-दूसरे पर निर्भर है, इसलिए यह विषय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। लेकिन कोई भी साझेदारी तभी सफल हो सकती है जब उसकी नींव भरोसे पर टिकी हो। उन्होंने कहा कि भारत पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखता है। भारत का अनुभव बताता है कि विकास तभी सबसे प्रभावी होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सोच भारत की अंतरराष्ट्रीय पहलों और साझेदारियों का आधार भी है।

'आज दुनिया भरोसे की कमी से पीड़ित है'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस, मिशन लाइफ और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसे अभियान इसी सोच को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में आपसी विश्वास सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति है। दुर्भाग्य से दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से पीड़ित है और भविष्य की साझेदारियां इसी भरोसे को दोबारा स्थापित करने पर निर्भर करेंगी।

अफ्रीका में भारत के प्रयासों का किया जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत मानता है कि किसी साझेदारी की असली कसौटी यह नहीं है कि हम दूसरों के लिए क्या बनाते हैं, बल्कि यह है कि हम दूसरों को अपने लिए क्या बनाने में सक्षम बनाते हैं। भारत की विकास साझेदारियां भी इसी भावना पर आधारित हैं। भारत ने साझेदार देशों में क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने अफ्रीका में भारत के प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, जल संसाधन, कृषि और ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की पहलें अफ्रीकी देशों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भी मदद कर रही हैं।

'ग्लोबल साउथ को दुनिया से बहुत उम्मीदें हैं'

प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ को दुनिया से बहुत उम्मीदें हैं। उसे केवल सहायता नहीं, बल्कि बराबरी की साझेदारी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया को दाता और प्राप्तकर्ता (Donor-Recipient) की पुरानी सोच से आगे बढ़ना होगा और समान भागीदार के रूप में मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि देशों को केवल साथ-साथ नहीं, बल्कि एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए। साझेदारियां सम्मान पर आधारित होनी चाहिए, निर्भरता पर नहीं।

विदेश मंत्रालय ने भी जारी किया बयान

विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बयान में बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने G7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सेशन में 'नई साझेदारियों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण' विषय पर आयोजित चर्चा में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज की तेजी से जुड़ती दुनिया में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के निर्माण में 'भरोसा' सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। MEA के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक सहयोग को दाता-प्राप्तकर्ता की पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़कर समानता और एकजुटता पर आधारित साझेदारी का रूप लेना चाहिए।

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